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Rainbow ॥सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम्॥
Posted by: Vipupakar - 10-05-2018, 09:12 PM - Forum: Discussion on Tantra, Mantra & Yantra - No Replies

Heart ॥सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम्॥  Heart

शिव उवाच

शृणु देवि प्रवक्ष्यामि, कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्।
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत॥१॥

न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम्॥२॥

कुञ्जिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्।
अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम्॥३॥

गोपनीयं प्रयत्‍‌नेन स्वयोनिरिव पार्वति।
मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्।
पाठमात्रेण संसिद्ध्येत् कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्॥४॥

॥अथ मन्त्रः॥
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल 
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥
॥इति मन्त्रः॥

नमस्ते रूद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि।
नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनि॥१॥

नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिनि।
जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरूष्व मे॥२॥

ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका।
क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते॥३॥

चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी।
विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मन्त्ररूपिणि॥४॥

धां धीं धूं धूर्जटेः पत्‍‌नी वां वीं वूं वागधीश्‍वरी।
क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु॥५॥

हुं हुं हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी।
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः॥६॥

अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं।
धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा॥७॥

पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा।
सां सीं सूं सप्तशती देव्या मन्त्रसिद्धिं कुरुष्व मे॥८॥

इदं तु कुञ्जिकास्तोत्रं मन्त्रजागर्तिहेतवे।
अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति॥
यस्तु कुञ्जिकाया देवि हीनां सप्तशतीं पठेत्।
न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा॥

इति श्रीरुद्रयामले गौरीतन्त्रे शिवपार्वतीसंवादे कुञ्जिकास्तोत्रं सम्पूर्णम्।
॥ॐ तत्सत्॥

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Rainbow Inspirational Short Story that Will Motivate You
Posted by: Vipupakar - 09-17-2018, 08:15 PM - Forum: Stories, Bio, Incidents - No Replies

Heart Everyone Has a Story in Life Heart
A 24 year old boy seeing out from the train’s window shouted…
“Dad, look the trees are going behind!” Smile
Dad smiled and a young couple sitting nearby Confused ,
looked at the 24 year old’s childish behavior with pity, suddenly he again exclaimed…
“Dad, look the clouds are running with us!”
The couple couldn’t resist Idea and said to the old man
“Why don’t you take your son to a good doctor?”
The old man smiled Smile and said…
“I did and we are just coming from the hospital,
my son was blind from birth,
he just got his eyes today.”
Every single person on the planet has a story.


Don’t judge people before you truly know them. Shy
The truth might surprise you.

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Star How Reiki Help in Our Life रेकी हमारे जीवन में किस तरह से मदद करती हैं.
Posted by: Pradeep.Shaktawat - 05-19-2018, 11:47 PM - Forum: USUI Reiki - No Replies

Heart Heart
we discussed the basics of Reiki in previous post, here we will discuss that how it will help in our life.

as it is the universal healing power, we can invoke it for any purpose, but with pure and good intention because purity of intention is must and another thing is that one have to avoid doership. because after atonement we became a channel of reiki  so as a channel we are only mediator, the work is performing by t he subprime source.

as per my personal experience :

Reiki can cure any serious disease and reiki cannot control a normal headache 

we will discuss its reason in different post.

the help of reiki in our life or uses of reiki are as follows:

  • Self healing
  • Others healing
  • Pets healing
  • Healing of nature and mother Earth
  • Healing of any situation
  • Creation of positivity
  • Removal of negativity
  • Enhancement of positivity
  • Stress removal
  • For physical, mental and emotional relaxation
  • Restore Relationships
and many more as its not the theoretical topic its practical thing that :
Learn Practice and Feel 




पिछली पोस्ट में रेकी क्या हैं इस बारे में चर्चा  हुई थी , अब यहाँ  हम इस पर चर्चा करेंगे रेकी का हमारे दैनिक जीवन में क्या उपयोग एवं लाभ हैं.

रेकी ब्रह्माण्डीय हीलिंग शक्ति हैं , इसका आवाहन हम कभी भी और किसी भी परिस्थिति में कर सकतें हैं. परन्तु एक बात का  ध्यान अवश्य रखना चाहिए की इसका आवाहन शुद्ध और पवित्र भाव से हो, गलत इरादे से इसका आवाहन नहीं किया जाना चाहिए साथ ही हम में कर्ता भाव भी नहीं आना चाहिए, क्युकी शक्तिपात के बाद हम रेकी चैनल बनते हैं और एक चैनल के रूप में हम सिर्फ माध्यम हैं कर्ता नहीं, कर्ता तो सर्वोच्च शक्ति हैं.
मेरे व्यक्तिगत अनुभव के अनुसार :

रेकी से किसी गंभीर बीमारी का भी उपचार हो सकता हैं और रेकी से साधारण सर दर्द भी सही हो ज़रुरी नहीं हैं.

हम इस की वजह पर  दूसरी पोस्ट में चर्चा करेंगे.

हमारे दैनिक जीवन में रेकी के निम्न लाभ/उपयोग हैं:

  • खुद का उपचार.
  • दूसरों का उपचार.
  • जानवरों का उपचार.
  • प्रकृति और धरती का उपचार.
  • किसी परिस्थिति को सही करना/सकारात्मक करना.
  • सकारात्मकता उत्पन्न करना.
  • नकारात्मकता दूर करना.
  • सकारात्मकता को बढ़ाना.
  • तनाव मुक्ति.
  • शारीरिक , मानसिक एवं भावनात्मक विश्राम प्राप्त करना.
  • रिश्तों में सुधार. 

आदि, परन्तु यह सब बात करने का विषय नहीं अनुभव करने का विषय हैं. अतः
सीखें  अभ्यास करें और अनुभव करें.

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Thumbs Up What is Reiki? रेकी क्या हैं?
Posted by: Pradeep.Shaktawat - 05-18-2018, 10:58 PM - Forum: USUI Reiki - Replies (1)

Heart Heart

     
Dr Mikao Usui

Reiki is a Japanese word, it is made of two words, Rei + Ki. Here rei means universal and ki means life force energy, so we can say that reiki means universal life force energy.

Before reiki there were few other healing modalities in japan and presently the world is having hundreds of modalities of various reiki systems. But Usui Reiki is most trusted and commonly used modality.

The founder of USUI Reiki is Dr. Mikao Usuik, A Buddhist  from Taniai-village, Yamagata- district, Cifu state, Japan. Dr. Usui was born on 15th August, 1865.
One day his student asked him “Can anyone be cured just by touching”?, is it Possible?

To found the answer Dr. Usui Climbed Mt. KURAMA, a mountain to the north-west of the city of Kyoto. 
And he began to do penance/deep meditation while fasting, on twenty first day he felt that a whit ball of light came to him and penetrated in his third eye. By that process he was spiritually awakened and acquired the divine power of Reiki.

After that from various lineage it spread all around the world



रेकी एक जापानी शब्द हैं जो की दौ शब्दों से मिल कर बना हैं, रे+की.“रे” का अर्थ हैं ब्रह्माण्ड और “की” का अर्थ हैं जीवन दायिनी शक्ति, इस तरह से रेकी का अर्थ हुआ ब्रह्माण्ड की जीवन दायिनी शक्ति.

रेकी से पहले भी जापान में कुछ हीलिंग मोडलीटीज़ थी एवं वर्तमान में विश्व में रेकी की सेकड़ों मोडलीटीज़ हैं, उनमे उसुई रेकी सर्वाधिक प्रचलित एवं विश्वसनीय मोडलीटी हैं.
उसुई रेकी के प्रणेता डॉ. मिकाओ उसुई हैं, जो की एक बोद्ध थे एवं जिनका जन्म  15 अगस्त 1865 को जपान के किफ़ु राज्य में यामागाता जिले के तनियाई गाँव में हुआ था.

एक दिन उनसे उनके एक छात्र ने प्रश्न किया की "किसी को छू कर किस प्रकार ठीक किया जा सकता हैं"? क्या यह संभव हैं?
इस प्रश्न का जवाब खोजने के लिए डॉ. मिकाओ उसुई क्योटो शहर के उत्तर-पश्चिम में स्थित कुरुमा पर्वत पर गए और वहाँ पर निराहार तपस्या प्रारंभ करी, तपस्या के 21वें दिन उन्हें लगा की एक सफ़ेद प्रकाशपुंज उनकी तरफ़ आया और उनके तीसरे नेत्र में प्रवेश कर गया. उस प्रक्रिया के द्वारा उनमे आध्यात्मिक ज्ञान जागृत हुआ और उन्हें रेकी शक्ति की प्राप्ति हुई.
उसके पश्चात विभिन्न परम्पराओं से उसुई रेकी दुनियां में फ़ैल गयी.
Heart Heart

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  अर्धागिंनी
Posted by: Vipupakar - 05-05-2018, 02:42 PM - Forum: Stories, Bio, Incidents - No Replies

?  *अर्धागिंनी* ? 
?✨???

"रामलाल !! तुम अपनी बीबी से.. इतना क्यों डरते हो?"
मैने अपने.. नौकर से पुछा।।

"मै डरता नही , मैडम !!
 उसकी कद्र करता हूँ , उसका सम्मान करता हूँ।.."उसने जबाव दिया।

मैं हंसी और बोली-" ऐसा क्या है उसमें, ना शक्ल सुरत , ना पढी लिखी।"

जबाब मिला-" कोई फर्क नही पडता मैडम कि.. वो कैसी है पर.. मुझे सबसे प्यारा रिश्ता.. उसीका लगता है।"

"जोरू का गुलाम।"
मेरे मुँह से.. निकला।"
और सारे रिश्ते कोई मायने नही रखते तेरे लिये.." मैने पुछा।

उसने बहुत इत्मिनान से जबाब दिया-
"मैडम जी ! *माँ बाप* रिश्तेदार नही होते- वो.. *भगवान* होते हैं। उनसे रिश्ता नही निभाते , उनकी पूजा करते हैं।
*भाई बहन* के रिश्ते.. जन्मजात होते हैं , *दोस्ती* का रिश्ता भी.. ज्यादातर मतलब का.. ही होता है।
आपका मेरा रिश्ता भी.. जरूरत और पैसे का है
 पर..
*पत्नी* बिना किसी.. करीबी रिश्ते के होते हुए भी.. हमेशा के लिये हमारी हो जाती है ! अपने सारे रिश्ते को.. पीछे छोडकर, और हमारे हर सुख दुख की सहभागी बन जाती है , वो भी.. आखिरी साँसो तक।"

अब मैं.. अचरज से उसकी बातें सुन रही थी !

वह आगे बोला-"मैडम जी, *पत्नी* अकेला रिश्ता नही है, बल्कि वो.. पुरे *रिश्तों की भण्डार* है, जब वो.. हमारी सेवा करती है हमारी देख भाल करती है , हमसे दुलार करती है तो एक.. *माँ* जैसी होती है। जब वो.. हमें जमाने के उतार चढाव से आगाह करती है,और मैं.. अपनी सारी कमाई उसके हाथ पर रख देता हूँ क्योकि जानता हूँ वह हर हाल मे मेरे घर का भला करेगी तब.. *पिता* जैसी होती है।
जब वो.. हमारा ख्याल रखती है, हमसे लाड़ करती है, हमारी गलती पर डाँटती है, हमारे लिये.. खरीदारी करती है तब.. *बहिन* जैसी होती है। जब हमसे नयी नयी फरमाईश करती है, नखरे करती है, रूठती है , अपनी बात मनवाने की जिद करती है तब.. *बेटी* जैसी होती है।
जब हमसे सलाह करती है मशवरा देती है ,परिवार चलाने के लिये.. नसीहतें देती है, झगडे करती है तब एक.. *दोस्त* जैसी होती है।
 जब वह सारे घर का लेन देन , खरीददारी , घर चलाने की.. जिम्मेदारी उठाती है तो एक.. *मालकिन* जैसी होती है।
और जब वही सारी दुनिया को.. यहाँ तक कि अपने *बच्चों* को भी.. छोडकर हमारी बाहों मे.. आती है, तब वह..
 *पत्नी, प्रेमिका, प्रेयसी, अर्धांगिनी , हमारी प्राण और.. आत्मा होती है जो.. अपना सब कुछ सिर्फ हम पर.. न्योछावर करती है।"*?
इसलिए
मैं.. उसकी इज्जत करता हूँ ! तो क्या गलत करता हूँ  ? मैडम जी।"

मैं उसकी बात सुनकर.. अवाक रह गयी।।

एक अनपढ़ और.. सीमित साधनो मे.. जीवन निर्वाह करनेवाले से.. जीवन का यह फलसफा सुनकर.. मुझे एक नया अनुभव हुआ ।?

*आपको कैसा अनुभव हुआ*
?✨?✨?✨?✨?
  ? *राधे राधे*?✨?

???

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Question I want to know about Reiki
Posted by: pankaj08 - 05-05-2018, 11:33 AM - Forum: Various Discussions - Replies (1)

Dear Sir,

I want to know that what is reiki and how it works?
and how it will help in our life? 


Thanks

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Rainbow अंगारक योग
Posted by: Vipupakar - 05-02-2018, 11:44 PM - Forum: Various Discussions - No Replies

Heart ॐ अंग अंगारकाय नमः,
आज, 2 मई से मंगल के मकर राशि में आने से अंगारक_योग बन चूका है, केतु पहले से ही मकर राशि में गोचर कर रहा है
और आज से मंगल के मकर राशि में आने से मंगल और केतु का योग बन गया जिसे “अंगारक योग” कहा जाता है
और यह ज्योतिषीय दृष्टि से एक नकारात्मक योग है, यह कुछ विशेष ज्योतिषीय घटना भी है
“इस बार मंगल एक ही राशि (मकर) में पूरे छह महीने गोचर करेगा” जबकि सामान्यतः मंगल एक राशि में केवल डेढ़ माह ही रहता है
पर इस बार वक्री व मार्गी होकर 2 मई 2018 से 6 नवम्बर 2018 के बीच छः महीनो के लिए मंगल केतु के साथ मकर राशि में ही रहेगा
जो की फलित ज्योतिष की दृष्टि से संघर्ष बढ़ाने वाली ग्रहस्थिति होगी...
[Image: 2728.png]Heart

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  SAVE HUMAN BEHAVIOR
Posted by: Vipupakar - 05-02-2018, 11:35 PM - Forum: Stories, Bio, Incidents - No Replies

पिता बेटे को डॉक्टर बनाना चाहता था।
बेटा इतना मेधावी नहीं था कि PMT क्लियर कर लेता।
इसलिए दलालों से MBBS की सीट खरीदने का जुगाड़ किया गया। जमीन, जायदाद जेवर गिरवी रख के 35 लाख रूपये दलालों को दिए, लेकिन वहाँ धोखा हो गया।
फिर किसी तरह विदेश में लड़के का एडमीशन कराया गया, वहाँ भी चल नहीं पाया।
फेल होने लगा..


डिप्रेशन में रहने लगा।


रक्षाबंधन पर घर आया और यहाँ फांसी लगा ली।
20 दिन बाद माँ बाप और बहन ने भी कीटनाशक खा के आत्म हत्या कर ली।
अपने बेटे को डॉक्टर बनाने की झूठी महत्वाकांक्षा ने पूरा परिवार लील लिया।
माँ बाप अपने सपने, अपनी महत्वाकांक्षा अपने बच्चों से पूरी करना चाहते हैं....
मैंने देखा कि कुछ माँ बाप अपने बच्चों को
Topper बनाने के लिए इतना ज़्यादा अनर्गल दबाव डालते हैं कि बच्चे का स्वाभाविक विकास ही रुक जाता है।
आधुनिक स्कूली शिक्षा बच्चे की Evaluation और Grading ऐसे करती है जैसे सेब के बाग़ में सेब की खेती की जाती है।
पूरे देश के करोड़ों बच्चों को एक ही Syllabus पढ़ाया जा रहा है...
उदाहरण के लिए...
जंगल में सभी पशुओं को एकत्र कर सबका इम्तहान लिया जा रहा है और पेड़ पर चढ़ने की क्षमता देख के Ranking निकाली जा रही है। यह शिक्षा व्यवस्था ये भूल जाती है कि इस प्रश्नपत्र में तो बेचारा हाथी का बच्चा फेल हो जाएगा और बन्दर First आ जाएगा।
अब पूरे जंगल में ये बात फ़ैल गयी कि कामयाब वो जो झट से कूद के पेड़ पर चढ़ जाए। बाकी सबका जीवन व्यर्थ है।
इसलिए उन सब जानवरों के, जिनके बच्चे कूद के झटपट पेड़ पर न चढ़ पाए, उनके लिए कोचिंग Institute खुल गए, व्हाँ पर बच्चों को पेड़ पर चढ़ना सिखाया जाता है। चल पड़े हाथी, जिराफ, शेर और सांड़, भैंसे और समंदर की सब मछलियाँ चल पड़ीं अपने बच्चों के साथ, Coaching institute की ओर...... हमारा बिटवा भी पेड़ पर चढ़ेगा और हमारा नाम रोशन करेगा।
हाथी के घर लड़का हुआ.... 
तो उसने उसे गोद में ले के कहा- 'हमरी जिन्दगी का एक ही मक़सद है कि हमार बिटवा पेड़ पर चढ़ेगा।' और जब बिटवा पेड़ पर नहीं चढ़ पाया, तो हाथी ने सपरिवार ख़ुदकुशी कर ली।


अपने बच्चे को पहचानिए।
वो क्या है, ये जानिये। 
हाथी है या शेर, चीता, लकडबग्घा, जिराफ ऊँट है या मछली, या फिर हंस, मोर या कोयल ?
क्या पता वो चींटी ही हो ?


और यदि चींटी है आपका बच्चा, तो हताश निराश न हों। चींटी धरती का सबसे परिश्रमी जीव है और अपने खुद के वज़न की तुलना में एक हज़ार गुना ज्यादा वजन उठा सकती है।
इसलिए अपने बच्चों की क्षमता को परखें और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें.. हतोत्साहित नही......
SAVE HUMAN BEHAVIOR
Love parents[Image: 1f64f_1f3fb.png]??

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Heart ब्राह्मण के घर से खाली हाथ कैसे जाएँगे??
Posted by: Vipupakar - 05-02-2018, 06:18 PM - Forum: Stories, Bio, Incidents - No Replies

ब्राह्मण के घर से खाली हाथ कैसै जाएंगे।


पिछले दिनों मैं हनुमान जी के मंदिर में गया था जहाँ पर मैंने एक ब्राह्मण को देखा, जो एक जनेऊ हनुमान जी के लिए ले आये थे | 
संयोग से मैं उनके ठीक पीछे लाइन में खड़ा था, मेंने सुना वो पुजारी से कह रहे थे कि वह स्वयं का काता (बनाया) हुआ जनेऊ हनुमान जी को पहनाना चाहते हैं, पुजारी ने जनेऊ तो ले लिया पर पहनाया नहीं | जब ब्राह्मण ने पुन: आग्रह किया तो पुजारी बोले यह तो हनुमान जी का श्रृंगार है इसके लिए बड़े पुजारी (महन्थ) जी से अनुमति लेनी होगी, आप थोड़ी देर प्रतीक्षा करें वो आते ही होगें |

मैं उन लोगों की बातें गौर से सुन रहा था, जिज्ञासा वश मैं भी महन्त जी के आगमन की प्रतीक्षा करने लगा | थोड़ी देर बाद जब महन्त जी आए तो पुजारी ने उस ब्राह्मण के आग्रह के बारे में बताया तो महन्थ जी ने ब्राह्मण की ओर देख कर कहा कि देखिए हनुमान जी ने जनेऊ तो पहले से ही पहना हुआ है और यह फूलमाला तो है नहीं कि एक साथ कई पहना दी जाए | आप चाहें तो यह जनेऊ हनुमान जी को चढ़ाकर प्रसाद रूप में ले लीजिए |
इस पर उस ब्राह्मण ने बड़ी ही विनम्रता से कहा कि मैं देख रहा हूँ कि भगवान ने पहले से ही जनेऊ धारण कर रखा है परन्तु कल रात्रि में चन्द्रग्रहण लगा था और वैदिक नियमानुसार प्रत्येक जनेऊ धारण करने वाले को ग्रहणकाल के उपरांत पुराना बदलकर नया जनेऊ धारण कर लेना चाहिए बस यही सोच कर सुबह सुबह मैं हनुमान जी की सेवा में यह ले आया था प्रभु को यह प्रिय भी बहुत है | हनुमान चालीसा में भी लिखा है कि - *हाथ बज्र और ध्वजा विराजे, कांधे मूज जनेऊ साजे* | अब महन्त जी थोड़ी सोचनीय मुद्रा में बोले कि हम लोग बाजार का जनेऊ नहीं लेते हनुमान जी के लिए शुद्ध जनेऊ बनवाते हैं, आपके जनेऊ की क्या शुद्धता है | 

इस पर वह ब्राह्मण बोले कि प्रथम तो यह कि ये कच्चे सूत से बना है, इसकी लम्बाई 96 चउवा (अंगुल) है, पहले तीन धागे को तकली पर चढ़ाने के बाद तकली की सहायता से नौ धागे तेहरे गये हैं, इस प्रकार 27 धागे का एक त्रिसुत है जो कि पूरा एक ही धागा है कहीं से भी खंडित नहीं है, इसमें प्रवर तथा गोत्रानुसार प्रवर बन्धन है तथा अन्त में ब्रह्मगांठ लगा कर इसे पूर्ण रूप से शुद्ध बनाकर हल्दी से रंगा गया है और यह सब मेंने स्वयं अपने हाथ से गायत्री मंत्र जपते हुए किया है |
ब्राह्मण देव की जनेऊ निर्माण की इस व्याख्या से मैं तो स्तब्ध रह गया मन ही मन उन्हें प्रणाम किया, मेंने देखा कि अब महन्त जी ने उनसे संस्कृत भाषा में कुछ पूछने लगे, उन लोगों का सवाल - जबाब तो मेरे समझ में नहीं आया पर महन्त जी को देख कर लग रहा था कि वे ब्राह्मण के जबाब से पूर्णतया सन्तुष्ट हैं अब वे उन्हें अपने साथ लेकर हनुमान जी के पास पहुँचे जहाँ मन्त्रोच्चारण कर महन्त व अन्य 3 पुजारियों के सहयोग से हनुमान जी को ब्राह्मण देव ने जनेऊ पहनाया तत्पश्चात पुराना जनेऊ उतार कर उन्होंने बहते जल में विसर्जन करने के लिए अपने पास रख लिया | मंदिर तो मैं अक्सर आता हूँ पर आज की इस घटना ने मन पर गहरी छाप छोड़ दी, मेंने सोचा कि मैं भी तो ब्राह्मण हूं और नियमानुसार मुझे भी जनेऊ बदलना चाहिए, उस ब्राह्मण के पीछे-पीछे मैं भी मंदिर से बाहर आया उन्हें रोककर प्रणाम करने के बाद अपना परिचय दिया और कहा कि मुझे भी एक जोड़ी शुद्ध जनेऊ की आवश्यकता है, तो उन्होंने असमर्थता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तो वह बस हनुमान जी के लिए ही ले आये थे हां यदि आप चाहें तो मेरे घर कभी भी आ जाइएगा घर पर जनेऊ बनाकर मैं रखता हूँ जो लोग जानते हैं वो आकर ले जाते हैं | मेंने उनसे उनके घर का पता लिया और प्रणाम कर वहां से चला आया.

 शाम को उनके घर पहुंचा तो देखा कि वह अपने दरवाजे पर तखत पर बैठे एक व्यक्ति से बात कर रहे हैं , गाड़ी से उतरकर मैं उनके पास पहुंचा मुझे देखते ही वो खड़े हो गए, और मुझसे बैठने का आग्रह किया अभिवादन के बाद मैं बैठ गया, बातों बातों में पता चला कि वह अन्य व्यक्ति भी पास का रहने वाला ब्राह्मण है तथा उनसे जनेऊ लेने आया है | ब्राह्मण अपने घर के अन्दर गए इसी बीच उनकी दो बेटियाँ जो क्रमश: 12 वर्ष व 8 वर्ष की रही होंगी एक के हाथ में एक लोटा पानी तथा दूसरी के हाथ में एक कटोरी में गुड़ तथा दो गिलास था, हम लोगों के सामने गुड़ व पानी रखा गया, मेरे पास बैठे व्यक्ति ने दोनों गिलास में पानी डाला फिर गुड़ का एक टुकड़ा उठा कर खाया और पानी पी लिया तथा गुड़ की कटोरी मेरी ओर खिसका दी, पर मेंने पानी नहीं पिया कारण आप सभी लोग जानते होंगे कि हर जगह का पानी कितना दूषित हो गया है कि पीने योग्य नहीं होता है घर पर आर.ओ. लगा है इसलिए ज्यादातर आर.ओ. का ही पानी पीता हूँ बाहर रहने पर पानी की बोतल खरीद लेता हूँ | इतनी देर में ब्राह्मण अपने घर से बाहर आए और एक जोड़ी जनेऊ उस व्यक्ति को दिए, जो पहले से बैठा था उसने जनेऊ लिया और 21 रुपए ब्राह्मण को देकर चला गया |

मैं अभी वहीं रुका रहा इस ब्राह्मण के बारे में और अधिक जानने का कौतुहल मेरे मन में था, उनसे बात-चीत में पता चला कि वह संस्कृत से स्नातक हैं नौकरी मिली नहीं और पूँजी ना होने के कारण कोई व्यवसाय भी नहीं कर पाए, घर में बृद्ध मां पत्नी दो बेटियाँ तथा एक छोटा बेटा है, एक गाय भी है | वे बृद्ध मां और गौ-सेवा करते हैं दूध से थोड़ी सी आय हो जाती है और जनेऊ बनाना उन्होंने अपने पिता व दादा जी से सीखा है यह भी उनके गुजर-बसर में सहायक है | इसी बीच उनकी बड़ी बेटी पानी का लोटा वापस ले जाने के लिए आई किन्तु अभी भी मेरी गिलास में पानी भरा था उसने मेरी ओर देखा लगा कि उसकी आँखें मुझसे पूछ रही हों कि मेंने पानी क्यों नहीं पिया, मेंने अपनी नजरें उधर से हटा लीं, वह पानी का लोटा गिलास वहीं छोड़ कर चली गयी शायद उसे उम्मीद थी की मैं बाद में पानी पी लूंगा | अब तक मैं इस परिवार के बारे में काफी है तक जान चुका था और मेरे मन में दया के भाव भी आ रहे थे | खैर ब्राह्मण ने मुझे एक जोड़ी जनेऊ दिया, तथा कागज पर एक मंत्र लिख कर दिया और कहा कि जनेऊ पहनते समय इस मंत्र का उच्चारण अवश्य करूं -- |

मैंने सोच समझ कर 500 रुपए का नोट ब्राह्मण की ओर बढ़ाया तथा जेब और पर्स में एक का सिक्का तलाशने लगा, मैं जानता था कि 500 रुपए एक जोड़ी जनेऊ के लिए बहुत अधिक है पर मैंने सोचा कि इसी बहाने इनकी थोड़ी मदद हो जाएगी | ब्राह्मण हाथ जोड़ कर मुझसे बोले कि सर 500 सौ का फुटकर तो मेरे पास नहीं है, मेंने कहा अरे फुटकर की आवश्यकता नहीं है आप पूरा ही रख लीजिए तो उन्हें कहा नहीं बस मुझे मेरी मेहनत भर का 21 रूपए दे दीजिए, मुझे उनकी यह बात अच्छी लगी कि गरीब होने के बावजूद वो लालची नहीं हैं, पर मेंने भी पांच सौ ही देने के लिए सोच लिया था इसलिए मैंने कहा कि फुटकर तो मेरे पास भी नहीं है, आप संकोच मत करिए पूरा रख लीजिए आपके काम आएगा | उन्होंने कहा अरे नहीं मैं संकोच नहीं कर रहा आप इसे वापस रखिए जब कभी आपसे दुबारा मुलाकात होगी तब 21रू. दे दीजिएगा |
इस ब्राह्मण ने तो मेरी आँखें नम कर दीं उन्होंने कहा कि शुद्ध जनेऊ की एक जोड़ी पर 13-14 रुपए की लागत आती है 7-8 रुपए अपनी मेहनत का जोड़कर वह 21 रू. लेते हैं कोई-कोई एक का सिक्का न होने की बात कह कर बीस रुपए ही देता है | मेरे साथ भी यही समस्या थी मेरे पास 21रू. फुटकर नहीं थे, मेंने पांच सौ का नोट वापस रखा और सौ रुपए का एक नोट उन्हें पकड़ाते हुए बड़ी ही विनम्रता से उनसे रख लेने को कहा तो इस बार वह मेरा आग्रह नहीं टाल पाए और 100 रूपए रख लिए और मुझसे एक मिनट रुकने को कहकर घर के अन्दर गए, बाहर आकर और चार जोड़ी जनेऊ मुझे देते हुए बोले मेंने आपकी बात मानकर सौ रू. रख लिए अब मेरी बात मान कर यह चार जोड़ी जनेऊ और रख लीजिए ताकी मेरे मन पर भी कोई भार ना रहे | मेंने मन ही मन उनके स्वाभिमान को प्रणाम किया साथ ही उनसे पूछा कि इतना जनेऊ लेकर मैं क्या करूंगा तो वो बोले कि मकर संक्रांति, पितृ विसर्जन, चन्द्र और सूर्य ग्रहण, घर पर किसी हवन पूजन संकल्प परिवार में शिशु जन्म के सूतक आदि अवसरों पर जनेऊ बदलने का विधान है, इसके अलावा आप अपने सगे सम्बन्धियों रिस्तेदारों व अपने ब्राह्मण मित्रों को उपहार भी दे सकते हैं जिससे हमारी ब्राह्मण संस्कृति व परम्परा मजबूत हो साथ ही साथ जब आप मंदिर जांए तो विशेष रूप से गणेश जी, शंकर जी व हनूमान जी को जनेऊ जरूर चढ़ाएं... उनकी बातें सुनकर वह पांच जोड़ी जनेऊ मेंने अपने पास रख लिया और खड़ा हुआ तथा वापसी के लिए बिदा मांगी, तो उन्होंने कहा कि आप हमारे अतिथि हैं पहली बार घर आए हैं हम आपको खाली हाथ कैसे जाने दो सकते हैं??

 इतना कह कर उनहोंने अपनी बिटिया को आवाज लगाई वह बाहर निकाली तो ब्राह्मण देव ने उससे इशारे में कुछ कहा तो वह उनका इशारा समझकर जल्दी से अन्दर गयी और एक बड़ा सा डंडा लेकर बाहर निकली, डंडा देखकर मेरे समझ में नहीं आया कि मेरी कैसी बिदायी होने वाली है | अब डंडा उसके हाथ से ब्राह्मण देव ने अपने हाथों में ले लिया और मेरी ओर देख कर मुस्कराए जबाब में मेंने भी मुस्कराने का प्रयास किया | वह डंडा लेकर आगे बढ़े तो मैं थोड़ा पीछे हट गया उनकी बिटिया उनके पीछे पीछे चल रह थी मेंने देखा कि दरवाजे की दूसरी तरफ दो पपीते के पेड़ लगे थे डंडे की सहायता से उन्होंने एक पका हुआ पपीता तोड़ा उनकी बिटिया वह पपीता उठा कर अन्दर ले गयी और पानी से धोकर एक कागज में लपेट कर मेरे पास ले आयी और अपने नन्हें नन्हा हाथों से मेरी ओर बढ़ा दिया उसका निश्छल अपनापन देख मेरी आँखें भर आईं, मैं अपनी भीग चुकी आंखों को उससे छिपाता हुआ दूसरी ओर देखने लगा तभी मेरी नजर पानी के उस लोटे और गिलास पर पड़ी जो अब भी वहीं रखा था इस छोटी सी बच्ची का अपनापन देख मुझे अपने पानी न पीने पर ग्लानि होने लगी, मैंने झट से एक टुकड़ा गुड़ उठाकर मुँह में रखा और पूरी गिलास का पानी एक ही साँस में पी गया, बिटिया से पूछा कि क्या एक गिलास पानी और मिलेगा वह नन्ही परी फुदकता हुई लोटा उठाकर ले गयी और पानी भर लाई, फिर उस पानी को मेरी गिलास में डालने लगी और उसके होंठों पर तैर रही मुस्कराहट जैसे मेरा धन्यवाद कर रही हो , मैं अपनी नजरें उससे छुपा रहा था पानी का गिलास उठाया और गर्दन ऊंची कर के वह अमृत पीने लगा पर अपराधबोध से दबा जा रहा था, अब बिना किसी से कुछ बोले पपीता गाड़ी की दूसरी सीट पर रखा, और घर के लिए चल पड़ा, घर पहुंचने पर हाथ में पपीता देख कर मेरी पत्नी ने पूछा कि यह कहां से ले आए तो बस मैं उससे इतना ही कह पाया कि एक ब्राह्मण के घर गया था तो उन्होंने खाली हाथ आने ही नहीं दिया |

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  Kuldevi se shakti or kundalini jagran
Posted by: Jai gurudev - 04-30-2018, 02:23 PM - Forum: Various Discussions - No Replies

Kya mata kuldevi ki kripa se shakti , budhi prapti and kundalini jagran sambhav h. Kyunki, arjun , bheem, karan ki tarah haam many years tk tap karne mein samrath nhi ???

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